रानी पद्मावती (पद्मिनी) की सच्ची कहानी - भाग 1 - #padmavati

सभी को मेरा नमस्कार|
पूरे देश में पद्मावती फिल्म के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, सब को रानी पद्मावती की सच्ची कहानी जानने की इच्छा ज़रूर हुई होगी।
जैसा की मैंने अपने पिछले पोस्ट में कहा था, में रानी पद्मिनी(पद्मावती) की सच्ची कहानी से आपको परिचित कराना चाहता हू| तो चलिए आपको उन महान रानी की गाथा से रूबरू किया जाये।
रानी पद्मिनी का पहला उल्लेख कवी मलिक मुहम्मद जयसी की 1540 की कविता "पद्मावत" में पाया गया था|
"पद्मावत" के अनुसार रानी पद्मिनी का जन्म 13वी और 14वी शताब्दी के बीच, सिंहल द्वीप (आज का श्रीलंका) में हुआ था|
पद्मिनी अपनी अद्वित्य सुंदरता के कारण बहुत प्रसिद्ध थी और कई राजाओ की नज़र उनपे थी| उनके पास एक बोलने वाला तोता भी था, जिसका नाम हिरा-मणि था| हिरा-मणि ने पद्मिनी की सुंदरता का व्याख्यान जब चित्तोड़ के राणा रावल रतन सिंह के सामने किया, तो राणा खुद को रोक नहीं पाए और सिंहल द्वीप की तरफ चल पड़े| वहा उन्होंने पद्मिनी के लिए रचे गए स्वयंवर को जीतकर पद्मिनी को अपनी रानी बना लिया|
इसके आगे ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से रानी पद्मावती और कई क्षत्राणियों को अग्नि कुंड में कूदकर जौहर करना पड़ा?
जानने के लिए हमारे अगले पोस्ट को ज़रूर पढ़े|
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